समस्तीपुर: भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के कल्याणपुर प्रखंड के फूलहारा गांव में रविवार रात्रि को एक गंभीर और भयावह घटना सामने आई, जहां एक युवक को संदिग्ध चोर बताकर उग्र भीड़ ने बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए थे कि यह मामला मॉब लिंचिंग में तब्दील हो सकता था, लेकिन समय रहते पुलिस के मौके पर पहुंचने से युवक की जान बचा ली गई। पीड़ित युवक की पहचान कल्याणपुर थाना क्षेत्र के फूलवरिया जटमलपुर निवासी मो० दाऊद के रूप में हुई है।
भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि किसी अफवाह के आधार पर कुछ लोगों ने मो० दाऊद को पकड़ लिया और उसे चोर बताकर मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और भीड़ उग्र हो गई। उन्होंने आगे कहा कि युवक चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी बात सुनने की कोशिश नहीं की। सूचना मिलते ही कल्याणपुर थाना की पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से युवक को निकालकर अपने अभिरक्षा में लिया। पुलिस की तत्परता नहीं होती तो बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था।
इस घटना पर भाकपा माले के जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है, चाहे वह पुलिस अधिकारी हो या आम नागरिक। किसी को केवल शक के आधार पर सजा देना पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर भीड़ में शामिल दोषी लोगों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने राज्य में बढ़ती भीड़ हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता समाज के लिए बेहद खतरनाक है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो निर्दोष लोगों की जान पर बन आएगी। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाए और अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पीड़ित युवक का प्राथमिक उपचार कराया गया है और उससे घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किसने अफवाह फैलाई और किन लोगों ने युवक के साथ मारपीट की। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस सतर्क है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर लोग कानून पर भरोसा करने के बजाय खुद न्याय करने पर क्यों उतर आते हैं। समाज के जिम्मेदार लोगों का मानना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई करनी होगी, तभी मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर लगाम लग सकेगी।